महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और स्कोडा ऑटो वोक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (SAVWIPL) मिलकर भारत में एक जॉइंट वेंचर (JV) कंपनी बनाने की बात कर रहे थे, लेकिन अब लगता है कि यह प्लान कुछ मुश्किलों में फंस गया है। दोनों कंपनियों के बीच प्रोडक्ट डेवलपमेंट, गाड़ियों के प्लेटफॉर्म और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के इस्तेमाल को लेकर कुछ बातें अभी तक तय नहीं हो पाई हैं।
मुख्य जानकारी :
- अटकने की वजह: M&M अपनी ‘बॉर्न इलेक्ट्रिक’ रेंज के साथ ओवरलैप और कम ग्राउंड क्लीयरेंस की वजह से स्कोडा-VW के CMP 21 प्लेटफॉर्म को लेकर झिझक रहा है।
- स्कोडा-VW की मजबूरी: भारत में CAFE III नियमों के चलते, स्कोडा-VW को इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च करना जरूरी है, जिसके लिए उन्हें CMP 21 प्लेटफॉर्म की ज़रूरत है।
- JV का भविष्य: अभी यह साफ नहीं है कि यह जॉइंट वेंचर आखिर बनेगा या नहीं। अगर यह बनता है, तो इससे दोनों कंपनियों को लागत कम करने और नई टेक्नोलॉजी लाने में मदद मिल सकती है।
निवेश का प्रभाव :
- महिंद्रा एंड महिंद्रा: अगर यह JV नहीं बनता है, तो M&M को अपने दम पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों के विकास में ज्यादा निवेश करना पड़ सकता है, जिससे शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
- स्कोडा-VW: JV के बिना, स्कोडा-VW को भारत में अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की योजनाओं में देरी हो सकती है, जिससे बाजार में उनकी हिस्सेदारी कम हो सकती है।
- ऑटो सेक्टर: यह JV भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा मिल सकता है। निवेशकों को इस JV से जुड़ी खबरों पर नज़र रखनी चाहिए।